संघ शताब्दी वर्ष: इतिहास से वर्तमान तक “पांच परिवर्तन” का आह्वान, रसड़ा में प्रबुद्ध जन गोष्ठी सम्पन्न!

रसड़ा (बलिया)। 23 अप्रैल को रसड़ा जिले में कोलंबस इंटरनेशनल स्कूल में प्रबुद्ध जन गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों से सैकड़ों की संख्या में प्रबुद्ध जन एवं मातृशक्ति की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि द्वारा भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर मंच पर महामंडलेश्वर श्री कौशलेंद्र गिरी, बलिया के विभाग संघचालक माननीय श्री राम प्रताप सिंह जी, रसड़ा के जिला संघचालक डॉ. राम बाबू जी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्र प्रचारक श्री अनिल जी भाई साहब प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि ने कहा कि डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। इससे पूर्व वे 1920 के नागपुर कांग्रेस अधिवेशन और 1928 के कोलकाता कांग्रेस अधिवेशन में सक्रिय भूमिका निभा चुके थे। उन्होंने कांग्रेस के अनुशासन और राष्ट्रवाद से प्रेरित होकर सामाजिक संगठन को सर्वोपरि माना।
उन्होंने बताया कि आज पूरे देश में तिरंगा यात्रा का आयोजन हो रहा है, जो “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” का संदेश दे रही है और राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले वीरों को स्मरण करने का माध्यम बन रही है। संघ की 100 वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने पंजाब में आतंकवाद के दौर में शाखा पर हुए हमले और केरल में मास्टर सदानंद पर हुए प्राणघातक हमले का जिक्र करते हुए स्वयंसेवकों के अदम्य साहस और अटूट विचारधारा को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस अवसर पर सरसंघचालक द्वारा “पांच परिवर्तन” का आह्वान किया गया है, जिसमें सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी भाव एवं नागरिक कर्तव्य शामिल हैं। यह परिवर्तन पहले व्यक्ति, फिर परिवार, समाज और अंततः राष्ट्र में परिलक्षित होगा। तिरंगा यात्रा इसी जनजागरण का माध्यम बन रही है।
कार्यक्रम में प्रांत प्रचार प्रमुख श्री सुशील जी, बलिया विभाग के विभाग प्रचारक श्री अम्बेश जी, रसड़ा के जिला प्रचारक श्री अनुपम जी एवं नगर विस्तारक श्री श्रेयांश जी की भी विशेष उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का सफल संचालन जिला कार्यवाह श्री सतीश जी द्वारा किया गया। अंत में सामूहिक वंदे मातरम् के गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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