गौ-रक्षक दिगंबर बाबा के मेले में उमड़ा आस्था का सैलाब, बारिश के बीच पहुंचे हजारों श्रद्धालु



बेल्थरारोड (बलिया)।
श्रावण मास के तीसरे गुरुवार को बेल्थरारोड स्थित ऐतिहासिक दिगंबर बाबा के मेले में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। बारिश और फिसलन के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दरबार में पहुंचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की। श्रद्धालुओं ने बाबा को भूसा और आटे का प्रसाद अर्पित किया तथा गायों को भी श्रद्धापूर्वक चारा खिलाया।
स्थानीय लोगों के बीच दिगंबर बाबा का मेला ‘डम्बर बाबा का मेला’ के नाम से भी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि मुगल काल में गौ-रक्षा के लिए बाबा ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। इसी वजह से यह स्थान आज भी आस्था के साथ-साथ न्याय की परंपरा से जुड़ा माना जाता है। लोगों की मान्यता है कि यहां सच्चाई की पुष्टि के लिए कसम खाने की परंपरा आज भी कायम है।
मेले का शुभारंभ परंपरागत रूप से लाल ध्वज के झंडोत्तोलन के साथ हुआ। इसके बाद अखंड हरिकीर्तन और भक्ति गीतों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया। दिनभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा और परती भूमि में मौजूद गायों को भूसा व आटा खिलाने के लिए भी लोगों की भीड़ जुटी रही।
मेले में बच्चों के लिए झूले, खिलौनों की दुकानें और विभिन्न प्रकार के खान-पान के स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे। शाम होते-होते मेले में भीड़ और बढ़ गई। श्रद्धालुओं ने पूजा-पाठ के साथ मेले का आनंद भी लिया।
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार दिगंबर बाबा के दरबार में सच्चे मन से आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही विश्वास इस मेले को हर वर्ष लोगों के लिए विशेष बनाता है।
दिगंबर बाबा का मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ क्षेत्र की लोक संस्कृति, गौ-रक्षा और न्याय की परंपरा को भी जीवंत बनाए हुए है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों को एकजुट करने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम कर रही है।
