फ्रांस से लौटे प्रो. रामेश्वर दुबे ने कहा — पढ़ाई ऐसी हो कि नौकरी मांगनी न पड़े, देनी पड़े !





सेंट जेवियर्स स्कूल, बेल्थरारोड में सेमिनार के दौरान छात्रों को दिए सफलता के सूत्र

बिल्थरारोड (बलिया)।
सेंट जेवियर्स स्कूल में बुधवार को आयोजित एक शैक्षणिक संगोष्ठी में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शिक्षाविद प्रो. रामेश्वर दुबे ने छात्रों को जीवन में दिशा और उद्देश्य तय करने की प्रेरणा दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि ऐसा बनना चाहिए कि आप दूसरों को नौकरी दे सकें।

छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पढ़ाई का मकसद केवल IAS या डॉक्टर बनना नहीं होना चाहिए। शिक्षा वह है जो सोचने की क्षमता और आत्मनिर्भरता पैदा करे। उन्होंने सोशल मीडिया और टीवी डिबेट्स से दूरी बनाने की सलाह दी। बोले, “यूके की संसद की बहसें देखो, सोचने का तरीका बदलेगा।”

प्रो. दुबे ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की वर्तमान स्थिति पर चिंता भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि आज गांव में शिक्षक से अधिक सम्मान एक सिपाही को मिलता है, जो समाज की सोच को दर्शाता है और इसे बदलने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के दौरान स्कूल निदेशक डॉ. जे.आर. मिश्र और प्राचार्या श्रीमती शीला मिश्रा ने प्रो. दुबे को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया। इस मौके पर वाइस प्रिंसिपल तनवीर फातमा, शिक्षक बबलू जी, जे.के. गोयल सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।

कौन हैं प्रो. रामेश्वर दुबे?

मूलरूप से भारतीय, वर्तमान में मोंटपेलियर बिजनेस स्कूल, फ्रांस में प्रोफेसर

अतिथि प्राध्यापक रह चुके हैं लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी (UK) में

IIM जम्मू में सहायक प्राध्यापक के रूप में भी दे चुके हैं सेवाएं

शिक्षण अनुभव: ब्राज़ील, चीन, यूके, स्वीडन, फ्रांस, भारत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *