पूर्वजों की खोज में बिल्थरारोड पहुंचे नीदरलैंड के जितेंद्र छत्ता !

दैनिक भास्कर के पत्रकार के साथ फोटो


1892 में अंग्रेजों के छल से भेजा गया था परिवार सूरीनाम, पीढ़ियों बाद वतन की धरती पर लौटे वंशज

बलिया। गुलाम भारत की पीड़ा और परदेस की मजबूरी आज भी पीढ़ियों को जोड़ती है। नीदरलैंड (हालैंड) में उच्च पद पर कार्यरत जितेंद्र छत्ता इन दिनों अपने परिवार के साथ भारत यात्रा पर आए और अपने पूर्वजों की स्मृतियों को खोजते-खोजते बेल्थरा रोड पहुंचे। यही वह जगह है, जहां से उनके पूर्वजों की परदेशगमन की दर्दनाक कहानी की शुरुआत हुई थी।

अंग्रेजों के बहकावे में गया परिवार, सूरीनाम में झेली कठोर जिंदगी

बिल्थरा रोड क्षेत्र के सीयर गांव के सुंदर प्रसाद (पुत्र दुःखी) को अंग्रेजों ने वर्ष 1892 में छल से सूरीनाम भेजा। उन्हें बताया गया कि यह “राम का देश” है, जहां सोने की थाली में भोजन मिलेगा। बेहतर जीवन के सपनों में सुंदर प्रसाद (35 वर्ष) अपनी पत्नी अनरुजिया बिहारी (24 वर्ष) और तीन वर्षीय पुत्र दुःखी के साथ बेल्थरा रोड रेलवे स्टेशन से कोलकाता पहुंचे और वहां से जहाज द्वारा सूरीनाम भेज दिए गए।

सूरीनाम पहुंचते ही परिवार को कठोर मजदूरी में झोंक दिया गया। शोषण का शिकार होकर सुंदर प्रसाद सात वर्ष बाद ही चल बसे और एक साल बाद उनकी पत्नी अनरुजिया का भी निधन हो गया।

पीढ़ियों के संघर्ष से नीदरलैंड तक की यात्रा

दुखी के बाद उनके पुत्र कल्याण छत्ता, फिर पृथ्वीराज छत्ता और उसके बाद धर्मपाल छत्ता ने जीवन की गाड़ी आगे बढ़ाई। धर्मपाल ने भारत लौटने के बजाय नीदरलैंड में ही स्थायी रूप से बसने का निर्णय लिया। वर्तमान में उनके पुत्र जितेंद्र छत्ता “डिफ्ट साउथ हालैंड” में RADIUS CCA के मेंबर आफ सुपरवाइजरी बोर्ड पद पर कार्यरत हैं।

पूर्वजों की मिट्टी पर लौटे वंशज

जितेंद्र छत्ता 9 अगस्त को अपनी पत्नी शारदा रामसुख, पुत्री ऐश्वर्या और पुत्र शंकर के साथ दिल्ली पहुंचे। परिवार ने सबसे पहले अयोध्या जाकर श्रीराम मंदिर का दर्शन किया और फिर पूर्वजों की धरती बेल्थरा रोड पहुंचे।

यहां उन्होंने पुलिस चौकी इंचार्ज चंद्रशेखर यादव से मदद मांगी। प्रभारी ने तत्काल सीयर वार्ड के सभासद सज्जन कुमार सिंह को बुलाया और जानकारी जुटाने का प्रयास किया। सज्जन सिंह भी कोइरी समाज से हैं। उन्होंने काफी खोजबीन की लेकिन सुंदर प्रसाद के वंशज या पुश्तैनी घर का पता नहीं चल सका।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *