मातेश्वरी सोनकली देवी चन्दाडीह में चल रहे कथा में सीता विवाह का मार्मिक प्रसंग सुनकर भक्तगण मंत्रमुग्ध हो गए

बिल्थरारोड। पूर्वांचल में ख्याति प्राप्त चन्दाडीह स्थित माँ मातेश्वरी सोनकली देवी मन्दिर प्रांगण में चल रहे नव दिवसीय संगीतमयी श्री हवनात्मक शतचण्डी महायज्ञ के पांचवे दिन रविवार को सीता विवाह के प्रसंग पर प्रकाश डाला गया जिसे सुनकर श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो उठे। कुशीनगर से पधारे कथा वाचक पण्डित वीरेन्द्र तिवारी ने सीता विवाह पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजा जनक ने कहा कि जो शिव धनुष को तोड़ेगा उसी के साथ अपनी पुत्री सीता का विवाह करूंगा। यह सुनकर देश विदेश के राजा जनकपुर पहुँचते है। धनुष यज्ञ में पहुँचे राजाओं ने शिव धनुष को तोड़ने की जोर अजमाइस की किन्तु शिव धनुष टस से मस नही हुई। यह देख राजा जनक ने कहा कि यह धरती वीरों से खाली है। कोई शिव धनुष नही तोड़ पायेगा अब हमारी पुत्री सीता का विवाह नही हो पायेगा। इस बात को ऋषि विश्वामित्र पता चला तो राम , लक्ष्मण, भरत और शत्रुधन को लेकर अयोध्या से चल देते है और धनुष यज्ञ में पहुँचते है। राजा जनक के बीरो से खाली होने की बात को सुनकर लक्ष्मण तमतमा उठते है। और कहते है कि राजा जनक जी यह धरती बीरो से खाली नही है । इसी बात पर ऋषि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर रामचन्द्र जी उठते है और शिव धनुष को पकड़ते ही शिव धनुष टूट जाती है। शिव धनुष टूटते ही आकाश से देवता लोग पुष्प वर्षा होने लगती है और चहुओर जय जयकारा होने लगता। धनुष भंग होने के बाद राजा जनक अपने अपनी पुत्री सीता का विवाह राम के साथ करते है। सीता जी श्रीराम के गले में जयमाला डालती है। जयमाला डालते ही देवता लोग पुष्प वर्षा करते है। इसके बाद सीता जी के साथ श्रीराम और चारो भाई को लेकर विश्वामित्र जी अयोध्या पहुँचते है। पुरे राज्य में खुशियां मनायी जाती है। इस प्रसंग को सुनकर भक्तगण भाव विभोर हो गये। वही बृंदावन धाम रासलीला मंडली ने श्रीकृष्ण जन्म का जीवंत मंचन किया जिसे देख लीला प्रेमी भावविभोर हो गए। इस मौके पर पूर्व विधायक केदारनाथ वर्मा, अवधेश मिश्र, सदानन्द मिश्र, मुन्ना मिश्र, विनय मिश्र,रामजन्म यादव, नायब सिंह, कृष्णानन्द मिश्र, पारस मिश्र, दयाशंकर मिश्र , सुशील मिश्र सहित भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
