पुलिस की वर्दी में छिपा एक सच्चा योद्धा — असफलताओं के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत, डॉ. कृष्ण मोहन यादव बने प्रेरणा



बलिया/कुशीनगर:
जहां अक्सर लोग एक-दो बार असफल होने के बाद अपने सपनों को अलविदा कह देते हैं, वहीं पुलिस विभाग में कार्यरत एक साधारण सिपाही डॉ. कृष्ण मोहन यादव उन लाखों युवाओं के लिए मिसाल बन गए हैं, जो अपने जीवन में बड़ी ऊंचाइयों को छूना चाहते हैं लेकिन राह में आई रुकावटों से हार मान लेते हैं।

कुशीनगर की पावन भूमि से संबंध रखने वाले डॉ. कृष्ण मोहन यादव वर्तमान में बलिया जनपद में तैनात हैं। अत्यंत मृदुभाषी, सहज स्वभाव और संतुलित जीवन जीने वाले कृष्ण मोहन ना किसी से ईर्ष्या रखते हैं, ना ही कभी किसी से ऊँची आवाज में बात करते हैं। पुलिस विभाग में सबसे निचले पद – कांस्टेबल – पर कार्यरत होने के बावजूद उन्होंने खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से उस ऊंचाई पर बनाए रखा, जहां बहुत से लोग केवल सोचकर ही रुक जाते हैं।

2019 से लेकर अब तक, लगातार कई बार उन्होंने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (पीसीएस) की परीक्षा क्वालीफाई की, हर बार मुख्य परीक्षा (Mains) लिखी और वर्ष 2023 में तो देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली परीक्षा – यूपीएससी – के इंटरव्यू तक पहुँचे।

हर बार थोड़े से फासले से चूक जाना किसी भी सामान्य व्यक्ति को तोड़ सकता है, लेकिन डॉ. यादव की जिद है — “अगर जाना है, तो सिविल सेवा में ही जाना है।”

उनके हौसले को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि सफलता भले देर से मिले, लेकिन हिम्मत और उम्मीद कभी हार नहीं माननी चाहिए।….

आज समाज को ऐसे लोगों से प्रेरणा लेने की जरूरत है। हम सभी को उनके लिए एक बार दिल से प्रार्थना जरूर करनी चाहिए कि उनका सपना जल्द पूरा हो, और वे सिविल सेवा के रूप में देश की सेवा करें।



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