घाघरा नदी के कटान से किसानों की कई बीघा जमीन नदी में विलीन


बिल्थरारोड । घाघरा नदी रौद्र रूप के जलस्तर में घटाव के बाद नदी कटान के जरिए कहर बरपाना शुरू कर दिया है। इसके बाद भी स्थानीय प्रशासन कुम्भकर्णी निद्रा में सोया हुआ है। नदी का कटान इतना तेज है कि दो दिन में लगभग 50 बीघा जमीन को अपने आगोश में ले लिया है। कृषि योग्य जमीन नदी में विलीन हो रहा है। कटान तेज होने के चलते नदी का पानी टीएस बंधे से मात्र 20 मीटर दूर है। जिससे तटवर्ती गांव के लोग सहमे हुए है। जिला पंचायत सदस्य दिनेश यादव फौजी द्वारा इसकी सूचना जिला प्रशासन को दे दिया गया है। वही टगुनिया के ग्राम प्रधान महेश यादव का कहना है कि अगर इस तरह कटान तेज होता रहेगा तो हमारा गांव नदी में समाहित हो जायेगा। पूर्व में प्रशासन इस क्षेत्र को डेंजर जोन घोषित कर चुका है। नदी के जलस्तर में उतरांव से तटवर्ती गावो की कृषि योग्य सैकड़ो एकड़ भूमि कट-कटकर नदी में समाहित होती जा रही है।भूमि को नदी की जलधारा में विलीन होते देख किसानों के होश उड़ गए हैं। घाघरा के तटवर्ती क्षेत्र के टंगुनियां, चैनपुर गुलौरा,मठिया के राजभर बस्ती से लेकर हल्दी रामपुर तक नदी के किनारे कृषि योग्य भूमि कट-कट कर नदी में समाहित होती जा रही है,जिससे कृषि योग्य भूमि का आस्तित्व मिटता जा रहा है। घटाव का क्रम जारी है। जिला पंचायत सदस्य दिनेश यादव फौजी ने कहा कि उपजिलाधिकारी दीपशिखा सिंह के नम्बर पर इस बारे में बताने का प्रयास किया किन्तु उन्होंने ने फोन रिसीभ नही किया। जहां स्थानीय प्रशासन बाढ़ चौकियां अलर्ट होने की बात कह रहा हैं। कहि पर कर्मचारी ड्यूटी पर नही है। लगातार कटान जारी है। बाढ़ विभाग के अधिकारी का कहना है कि अभी कोई ज्यादे खतरा नही है। अगर समय रहते प्रशासन नही चेता तो लगातार कटान होने से टन्गुनिया, चैनपुर गुलौरा, मठिया आदि गांवो का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
