पूर्वजो द्वारा बैलों से खेत की जुताई करना अब लगभग बिलुप्त हो चूका है। वर्तमान व आने वाली पीढ़ी बता नही पायेगी की बैल क्या होते है।

बिल्थरारोड। किसानों के अमीरी तथा गरीबी की समानता का प्रतीक बैलों से हल चलाकर खेतो की जुताई करने की बात अतीत की बात बन गयी है।पहले किसान पुरे दिन अथक मेहनत से खेत की जुताई करके अन्न उपजाने का कार्य करता था। किन्तु बैलों से खेत की जुताई करने का स्थान अब ट्रैक्टर ले चुका है। जिसके चलते कहि पर गांव में किसी किसान के घर बैल नही दिखाई दे रहे है। अगर किसान के घर खेती के लिए बैल रहते तो गांव और खेतों में आवारा बछड़े दिखाई ही नही देते। आज की नयी पीढ़ी के लिए बैलों से खेत जोतने की बात सिर्फ फिल्मों और लोकगीतों, किताबो तक ही सीमित रह गयी है। नयी पीढ़ी को उनके पिता और बाबा व अन्य के द्वारा केवल सुनने को ही मिलता है। प्राचीन काल से लेकर एक दशक पूर्व तक किसानों द्वारा बैलों से हल जोतकर खेती का कार्य होता रहा है। किन्तु अब बैलों से हल चलाकर खेत जोतने का कार्य कही दिख नही रहा है। भोजपुरी फिल्मों में कभी कभी किसान द्वारा बैलों से हल चलाकर खेती करते दिखाया जाता है। अब कही कही पर बैलों को सिर्फ बैलगाड़ियों में ही देखने को मिलता है। शादी, विवाहों और अन्य मांगलिक कार्यो में मण्डप में हल के हरीश और जुआठ का प्रयोग प्राचीनकाल से आजतक होता चला आ रहा है। बैलों से खेती कार्य न होने से आज मांगलिक कार्यो में आज की स्थिति यह है कि जिनके यहाँ पहले खेत की जुताई हल से पहले होती थी लोग उनके घरों से हरीश और जुआठ मांगकर प्रयोग करते है। किसानों के द्वारा बैलों से हल चलाकर खेत जोतने का कार्य आधुनिक युग में समाप्त हो चुका है। नयी पीढ़ी के लिए हल जोतता हुआ किसान को देखने की बात अब कहानी बनकर रह गयी है। जहाँ देखिये वहाँ ट्रैक्टरों के माध्यम से ही खेती किसानी का कार्य हो रहा है। बीते दिनों की किसानों की शान और पहचान बैलों से हल जोतना अब फिल्मों, सीरियलों कहानियों और किताबो में ही सीमित हो गयी है।बैलों से खेत की जुताई करना अब लगभग बिलुप्त हो चूका है। वर्तमान व आने वाली पीढ़ी बैलों बता नही पायेगी की बैल क्या होते है। इनसे खेत की जुताई किसान कैसे करता था। साथ ही ये बैल ही एक किसान की पहचान होते थे। आज इन बैलों का किसान द्वारा प्रयोग नही करने पर बछड़े को कोई पूछने वाला नही है। पहले 5 हजार से 20 हजार रुपये में इनकी खरीदारी की जाती थी।
