मातु जी महारानी मातेश्वरी सोनकली मन्दिर के प्रांगण में चल रहे श्रीराम कथा में तड़का वध का प्रसंग सुन श्रोतागण हुए भावविभोर


बिल्थरारोड। क्षेत्र के चन्दाडीह स्थित माँ मातेश्वरी सोनकली देवी मन्दिर के प्रांगण में चल रहे सात दिवसीय श्रीराम कथा में गुरुवार को तड़का बध का मार्मिक प्रसंग चला। जिसे सुनकर भक्तगण भाव विभोर हो गए। झांसी से पधारे पण्डित सन्तोष जी कथा में बताया कि यज्ञ कर रहे विश्वामित्र को राक्षस मारीच और सुबाहु परेशान करके उनके यज्ञ को ध्वंस कर देते हैं। तब विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा के लिए अयोध्या नरेश दशरथ से उनके पुत्रों राम लक्ष्मण को मांगने जाते हैं। पुत्रमोह में दशरथ आनाकानी करते हैं लेकिन सूर्यवंश के कुलगुरु वशिष्ठ उन्हें समझा कर शांत करते हैं और राम लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ विदा करते हैं। ताड़क वन में ताड़का नामक राक्षसी से राम का युद्ध होता है और अंत में राक्षसी मारी जाती है। इसके बाद जब विश्वामित्र दोबारा यज्ञ करने बैठते हैं तो मारीच और सुबाहु फिर से यज्ञ में विघ्न डालने आ जाते हैं। राम सुबाहु का वध कर देते हैं और मारीच को बिना फण वाले वाण से सौ योजन दूर फेंक देते हैं। कथा को सुनकर श्रद्धालु मंत्र मुग्ध हो गए। इस मौके पर पुजारी आनन्द पाण्डेय, समाजसेवी विनय मिश्र, पुजारी जय पाण्डेय, निक्कू पाण्डेय, दयाशंकर सिंह, पारस मिश्र, सदानन्द मिश्र, अवधेश मिश्र आदि सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
