बिना गुरु के ज्ञान मिलना सम्भव नही है- ईश्वर दास ब्रह्मचारी जी


बिल्थरारोड । स्थानीय नगर के सर्वेश्वर मानस मंदिर चौकियांमोड़ के तत्वावधान में चल रही पंच कुण्डीय अद्वैत शिव शक्ति महायज्ञ एवं हनुमान महोत्सव के तीसरे दिन बुधवार शाम को अद्वैत शिवशक्ति परमधाम डूहां मठ के परिवज्रकाचार्य स्वामी ईश्वर दास ब्रह्मचारी ने चैत्र श्रीरामनवमी पूजा के मौके पर भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव की चर्चा करते हुए कहा कि परमात्मा का तेज यदि अपने अस्तित्व पर आ जायेगा तो पृथ्बी, आकास, तारे सभी लुप्त हो जायेगा। भगवान श्रीराम का अवतार परमात्मा के रुप में होता है। गुरु महिमा की चर्चा में कहा कि जो शिष्य गुरुदेव की आत्मा में अपने को नहीं जोड़ पाता है फिर वह मूल रास्ते से भटक जाता है। इस लिए धरती पर विना गुरु के ज्ञान मिलना सम्भव नही है।
कहा कि परमात्मा अजन्मा है। माता कौशिल्या के पेट में हवा भरा होता है। भगवान विष्णु धरती और आकाश के बीच कई रंगो के प्रकाश के बीच प्रकट होते हैं। फिर कौशिल्या के अनुरोध पर वे भगवान श्रीराम बालक का रुप लेते हैं। यहां पर मन शक्ति प्रभु के दर्शन के बाद काम नही करती है, फिर कौशिल्या को भगवान शक्ति प्रदान करते है। और माता कौशिल्या के गोद में भगवान बालक के रुप में आ जाते हैं। सूचना पाकर खुशी में राजा दशरथ झूम उठते है। भगवान श्रीराम मर्यादा में रहकर अपनी अलौकिक लीला दिखाई, इस लिए मर्यादा पुरुषोत्तम राम के रुप में देखे जाने लगें। बाबा ब्रह्मचारी जी ने नन्दरानी के घर भगवान श्रीकृण के बालक रुप जन्म की चर्चा के साथ भगवान के अलौकिक महिमा की चर्चा विस्तार से की।पं. प्रवीण कृष्ण जी महाराज ने कहा कि शिव पुराण में भगवान शिव के पार्थिव पूजन का बड़ा महत्व है। ब्रह्म हत्या से भी इंसान मुक्त हो जाता है। इस पूजन को करने से वह सभी पापों से मानव मुक्त हो जाता है। जो भगवान शिव के भष्म को धारण करता है, उससे 100 कोसों दूर भूत प्रेत भागते हैं। शिवपुराण के अनुसार कहा गया है कि एकमुखी रुद्राक्ष सर्व श्रेष्ठ माना गया है। वैसे 14 मुखी रुद्राक्ष का वर्णन किया गया है। शिव महापुराण में कहा गया है कि 14 मुखी रुद्राक्ष श्रेष्ठ ब्राम्बण से मंत्रोंच्चार के द्वारा पहनना चाहिए।कहा कि भगवान की अलग अलग कलाएं होती है, जिसमें लोगो का अलग-अलग मत है कि कृष्ण 16 कला पूर्ण थे लेकिन भगवान राम 12 कला ही पूर्ण थे। रामनवमी के दिन भगवान श्रीराम ने जन्म लेकर यह बताना चाहा है कि 9 का पहाड़ा जितनी बार पढें, उसके उत्तर की जोड़ 9 ही होगी। प्रमाण देते हुए कहा कि जैसे 9 से 3 गुणा करने पर 27 आयेगा, इसका जोड़ भी 9 हुआ। इस प्रकार ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीराम ने नवमी के दिन जन्म लेकर स्वयं को भी 16 कलाओं से पूर्ण सावित किया है। भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के मौके पर पुड़ी, खीर, सब्जी का महाप्रसाद भी खिलाया गया। निवर्तमान संसद व भाजपा प्रत्याशी रविन्द्र कुशवाहा ने पूर्व मंत्री छट्ठू राम , अशोक कुशवाहा संग कथा स्थल पर पहुँचकर ब्रह्मचारी जी महाराज का पैर छूकर आशीर्वाद लिया व कथा का श्रवण किया। पुलिस प्रशासन की ओर से भी नियमित सुरक्षा ब्यवस्था तैनात की जा रही है।
