जंगे आजादी में चरौवा के सेनानियों ने दी अपने प्राणों की आहुति



बिल्थरारोड। । चरौवा बलिदान दिवस के अवसर पर शुक्रवार को जिले के एक मात्र जीवित स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी रामविचार पाण्डेय ने चरौवा शहीद स्थल पर पहुँचकर शहीदों को पुष्प अर्पित कर नमन किया। उनके आने पर कोई प्रशासनिक अमला नही पहुँचा था। उस पर उन्होंने ने नाराजगी व्यक्त किया। कुछ देर उपजिलाधिकारी बेल्थरारोड एआर फारूकी शहीद स्थल पर पहुँचे। चरौवा ग्राम प्रधान देवेन्द्र यादव ने सेनानी रामविचार पाण्डेय को अंगवस्त्र देंकर सम्मानित किया। मौके पर मौजूद सभी लोगो ने शहीद स्थल पर पुष्प अर्पित कर शहीदों को याद कर नमन किया। इस मौके पर शहीद स्थल सेवा समिति के अध्यक्ष मार्कण्डेय सिंह, पूर्व विधायक धनन्जय कनौजिया, वर्तमान विधायक हंसू राम के प्रतिनिधि के रूप में राजबहादुर यादव, जिलापंचायत सदस्य हरेराम यादव, संजय यादव, उमेश अम्बेडकर आदि मौजूद रहे। ज्ञात हो कि अंग्रेजो से देश को आजाद कराने के लिए सन् 1942 के भारत स्वाधीनता संग्राम के जंगे अजादी की क्रान्ति के दौरान बलिया के क्रान्तिकारी वीरो मे देश के प्रति तरुणाई जाग उठी। इस जंग मे सीयर ब्लाक के चरौंवां गॉव के अमर शहीदों एवं स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियो ने जंगे आजादी में 25 अगस्त को अपने प्राणो की आहूति देकर बलिया का नाम स्वर्णिम अक्षरो मे अंकित कर दिया। बलिया वासियो के उग्र तेवर को देख अंग्रेज हुकमरान दंग रह गये। और उनकी शूरवीरता व अदम्य साहस से गोरो के खेमे मे खलबली मच गयी। जिससे अंग्रेज हुकमरानो ने विषेशाधिकार युक्त सर्वोच प्रशासक नेदर सोल व मार्क स्मिथ के नेतृत्व मे जल मार्ग से अंग्रेजी फौज की टुकड़ी बलिया भेजी। इस फौज का एक दास्ता कैप्टन मूर की देखरेख में ग्राम चरौंवां पहुॅचा। गोरो कों खुफिया रिर्पोट से पता चला कि चरौंवा गॉव क्रान्तिकारियो की गुप्त गतिविधियो का केन्द्र है। अंग्रेजो ने 25 अगस्त सन् 1942 को पूरे गॉव को घेर लिया और गॉव के मुखिया रामलखन सिंह के यहां चौकीदार भेजकर संदेश दिया कि पूरे गॉव को तबाही से बचाना चाहते हो तो क्रान्तिकारियो को हमें सौंप दो। चौकीदार की बात सूनते ही मुखिया रामलखन सिह आग बबूला हो गये और चौकीदार के कान पर ऐसा थप्पड़ मारा की कान से खून टपक पड़ा। इसके बाद अंग्रेजो ने दमन चक्र के तहत चरौंवां गॉव मे गोलिया बरसानी शुरू कर दी। तब क्रान्तिकारियो ने ग्रामीणो को ललकारा कि गोरो के हाथ मे बन्दूके हैं तो हमारे हाथ मे लाठी। जोष से भरे ग्रामीणो ने लाठी लेकर अंग्रजो पर टूट पड़े जिससे अंग्रेजो मे भगदड़ मच गयी। अंग्रेजो की गोली से खर बियार शहीद हो गया। यह देख मकतुलिया मालिन ने कैप्टन मूर के सिर पर हाड़ी चलाकर मार दी जिससे कैप्टन मूर तमतमा उठा और मकतुलिया मालिन को गोली मार दी । अंग्रेजो ने मृत मकतुलिया मालिन को उठवाकर घाघरा नदी मे फेकवा दिया। अंग्रेजो के द्वारा की गयी गोलाबारी मे मंगला सिंह , शिवशंकर सिंह , अंग्रेजो से लड़ते हुए शहीद हो गये। इस तरह चरौंवा के चार शुरवीर सपूतो ने देश के लिए शहादत दी। इस दौरान बृजबिहारी सिंह , राधाकृश्ण सिंह , कन्हैया सिंह , कपिलदेव सिंह , श्रीराम तिवारी , दषरथ सिंह , हरिप्रसाद स्वर्णकार , आदि ने अंग्रजो के दॉत खट्टे कर दिये। गोरो के इस ताण्डव की प्रतिक्रिया पूरे देष मे हुई। इसे गम्भीरता से लेते हुए कांग्रेस कमेटी ने फिरोज गॉधी को वस्तुतः स्थिति का जायजा लेने के लिए भेजा। इस हृदय विदारक सहादत को देख फिरोज गॉधी भी फफक पड़े। चरौंवां के शहीदों के याद मे शहीद स्मारक का निर्माण कराया गया है। आज भी 25 अगस्त को शहीद स्थल पर मेला लगता है। जहॉ विभिन्न दलो के प्रतिनिधि व संगठन के लोग कार्यक्रम मे भाग लेते है।
