स्मृति शेष उद्गारस्वर्गीय शिवकुमारी देवी जी की याद में

मुजौना के पूर्व प्रधान श्री धर्मजीत सिंह जी ( पति – स्वर्गीय शिवकुमारी देवी जी ) बताते हैं कि मै 17 साल प्रधान रहा तथा मेरी धर्मपत्नी 5 वर्ष तक प्रधान रही तथा गांव वासियों के साथ उनका व्यवहार परिवार की तरह रहा।इसके पश्चात
एक घटना का जिक्र करते हुए श्री सिंह बताते हैं कि 80 के दशक में भारत सरकार की पुनर्वास योजना के अंतर्गत लगभग 20 बिगहा ग्राम समाज की भूमि पर गांववासियों को बसाने की प्रेरणा मुझे मेरी धर्मपत्नी से मिली। योजना सरकारी थी किंतु उस समय बहुत सारी बाधाएं भी सामने आई , किन्तु जो आत्मबल तथा सहयोग मुझे उनसे मिला वो बहुत ही अलग अनुभव था।
मुझे ये कहने में कोई हिचक नहीं है कि गांववासियों का जो स्नेह उन्हें मिला ,वो अभूतपूर्व था। प्रति वर्ष जरूरतमंदों के बीच वस्त्र वितरण से लेकर आवश्यक सामग्रियों का वितरण उनकी हमेशा प्राथमिकता रही।
स्वर्गीय शिवकुमारी देवी जी के ज्येष्ठ पुत्र ,ब्लाक प्रमुख ( सीयर ) आलोक कुमार सिंह बताते हैं कि 2015 में मैने अपने राजनीतिक कैरियर की शुरुआत मां की प्रेरणा से ही किया , कर्मभूमि के रूप में भी मैने अपने जन्मभूमि को चुना तथा गांव का प्रधान बना। एक किस्सा बताते हुए प्रमुख श्री सिंह बताते हैं कि मेरे कार्यकाल में जब सभी गांव वासियों के आवास बन रहे थे तो मां ने खुशी जताते हुए कहा कि ये मेरी एक अधूरी हिस्सा थी जो अब पूरी हो रही है।मां की इच्छा थी कि गांव का हर एक परिवार मूलभूत सुविधाओं से युक्त हो ,और इसका बड़ा सबसे बड़ा कारण यही था कि मां का गांववासियों के साथ एक विशेष पारिवारिक रिश्ता था।
इसके बाद जब सीट आरक्षित हुई तो लंबे समय से श्री सिंह के पारिवारिक सहयोगी के रूप में रहे देवनाथ राजभर की धर्मपत्नी श्रीमती गीता राजभर प्रधान हुई ,मां की ही इच्छा थी कि श्री मति राजभर ग्राम प्रधान के रूप में चुनाव लड़े । उनके ग्राम प्रधान निर्वाचित होने के बाद भी गांववासियों के प्रति विकास तथा सहयोग की रफ्तार पूर्ववत ही रही।
छोटे पुत्र तथा महादेव कंस्ट्रक्शन के प्रबंध निदेशक श्री अनूप सिंह ” मंटू ” बताते हैं कि मेरी मां का जन्म बड़े ही कुलीन , सांस्कारिक एवं बड़े संयुक्त परिवार में हुआ था, जिससे उनके अंदर परिवार को साथ ले कर चलने की तथा परस्पर सम्बन्धो में समन्वय स्थापित करने की अदभुत क्षमता विरासत में मिली थी l माँ सादगी, सदभाव, विनम्रता, करुणा की प्रतिमूर्ति थी l हम लोगों के परवरिश , परिवार को एकीकृत करने के साथ एक आदर्श परिवार की स्थापना में उनके संस्कार स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ते हैं।माँ की विचारों को आगे ले जाने का प्रयास हम सभी आजीवन करेंगे l वो सदा हमलोगो की प्रेरणा स्रोत थी और हमेशा रहेगी l

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