बलिया का ऐतिहासिक मेला सोनाडीह का शुरुआत दूसरे प्रदेश से भी आए व्यापारी मेला के दूसरे दिन उमड़ा जनसैलाब पुलिस रही मुस्तैद
नीलेश दीपू



ऐतिहासिक ‘सोनाडीह मेला’ शुरू हो गया है। चैत्र रामनवमी से प्रारम्भ होकर पूर्णिमा तक चलने वाले इस मेले में बलिया जनपद के अलावा मऊ, देवरिया सहित विभिन्न जिलों से काफी संख्या श्रद्धालु आते हैं। इस मेले का पौराणिक महत्व है। मान्यता है कि जब क्षेत्र में राक्षसों का आतंक बढ़ गया तो मां चामुण्डा ने इनका संहार करने के बाद इसी स्थान पर विश्राम की थी। यह स्थान विजय स्थल के रूप में भी प्रसिद्ध है।
रामनवमी से प्रारम्भ सोनाडीह मेला अब शबाब पर है। श्रद्धालु मां भागेश्वरी व परमेश्वरी देवी के दर्शन व मनौतियों के बाद मेले में लगे दुकानों के लजीज व्यंजनों का आनंद लेते नजर आए। मेले में लगे झूलों, चरखी, मौत का कुआं, जादू के खेल आदि का भी आनंद भी बच्चों के साथ ही बड़े भी लेते देखे गए। तपती धूप व लू के थपेड़ो के बावजूद भी लोगों का मेला पहुंचना शुरू है। दोपहर में तेज धूप के चलते लोगों का आना कुछ कम हो रहा है। परन्तु सुबह व शाम मेले की रौनक देखते ही बनती है। इस मर्तबा मेले में श्रद्धालुओं को सर्कस का जहां अभाव खल रहा है वहीं बच्चे जादू का शो, झूला, चर्खी व रेल पटरी पर डाइनासोर की यात्रा कर प्रसन्न नजर आ रहे थे।
एक समय था जब यहां का विख्यात व विशाल सोनाडीह मेला में गैर प्रांतों के व्यापारियों की टोली पहुंचती थी कितु आज यहां की रौनक घटने लगी है। कभी यहां कोलकाता, इलाहाबाद, बिहार व अन्य प्रांतों से सैकड़ों की संख्या में फुटकर दुकानदार पहुंचते थे और इनके दम पर नवरात्र में विशाल मेला लगता था कितु पिछले एक दशक से यहां के मेला की रौनक कम हो गयी है।
