“नेता नहीं, आजीवन सेवक बनकर आया हूँ” कंबल वितरण कार्यक्रम में बोले राजेश सिंह दयाल





बिल्थरा रोड (बलिया)।
राजेश सिंह दयाल फाउंडेशन के संस्थापक राजेश सिंह दयाल ने कहा कि वे जनता के बीच किसी नेता के रूप में नहीं, बल्कि समाज के सेवक के रूप में आए हैं और जीवन पर्यंत सेवा करते रहना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन द्वारा लगातार स्वास्थ्य के क्षेत्र में कार्य किया जा रहा है और पूर्व की तरह आगे भी हिमांशु चौरसिया के सहयोग से इसी क्षेत्र में स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे, ताकि लोगों को बीमारियों से बचाया जा सके।
वे शनिवार को ग्राम पंचायत बांसपार बहोरवां में समाजसेवी हिमांशु चौरसिया की ओर से आयोजित कंबल वितरण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह देखकर पीड़ा होती है कि लोग कंबल और राशन के लिए एकत्र होने को मजबूर हैं। ईश्वर से प्रार्थना है कि समाज इतना सक्षम बने कि किसी को इस तरह की जरूरतों के लिए लाइन में न लगना पड़े।
राजेश सिंह दयाल ने समाज निर्माण पर जोर देते हुए कहा कि जब भी हम एकत्र हों, तो बच्चों की शिक्षा और समाज की बेहतरी के लिए ठोस प्रयास करें। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा समाज नहीं चाहिए जहां स्वार्थी नेता आएं और बच्चे केवल ताली बजाएं। जरूरत है ऐसे समाज की, जहां बच्चे शिक्षित हों, महिलाएं स्वस्थ हों और पुरुष स्वाभिमानी हों। उन्होंने महिलाओं और अभिभावकों के त्याग की सराहना करते हुए कहा कि समाज के निर्माण में सभी का योगदान बराबर है।
कार्यक्रम ग्राम बांसपार बहोरवां स्थित शिव मंदिर परिसर में संपन्न हुआ, जहां गरीब, असहाय एवं जरूरतमंद महिला-पुरुषों को कंबल वितरित किए गए। कंबल पाकर जरूरतमंदों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी।
कार्यक्रम के अंत में आयोजक समाजसेवी हिमांशु चौरसिया उर्फ सनी ने मुख्य अतिथि राजेश सिंह दयाल को मोमेंटो व ऊनी शॉल भेंट कर सम्मानित किया, वहीं अन्य अतिथियों को भी शॉल देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर राजेश चौरसिया, भुवनेश्वर शर्मा, सुभाष चौरसिया, धर्मेंद्र चौरसिया, संजय गुप्ता, गुलाब शर्मा, राजेंद्र राजभर, रामचंद्र कनौजिया, राहुल भारती, रामानंद प्रजापति, गौरी चौहान, अंशु चौरसिया, अंबिका चौरसिया उर्फ विक्की, अनिल राजभर, दीपक कनौजिया, यश चौरसिया, उमंग चौरसिया, विशाल राजभर, प्रदीप चौरसिया, संतोष चौरसिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मोहनलाल निराला ने की, जबकि संचालन नंद जी नंदा कवि ने किया।
