हल्दिरामपुर के नारापार बंधे में नदी के पानी का रिसाव होने से ग्राम प्रधान द्वारा बोरे में मिट्टी व बालू भरकर रिसाव बंद कराया जा रहा है

बिल्थरारोड। घाघरा नदी का पानी तटवर्ती गावो में पहुँचने से ग्रामीण सहमे हुए है । गांवों में नदी का पानी पहुँच गया है। लोग दूसरे जगह जाने को मजबूर हो गए है। गांवों में नाव चल रही है। वही हल्दिरामपुर के नारापार बंधे में रिसाव होने से ग्राम प्रधान प्रतिनिधि पूर्व प्रधान रामबृक्ष यादव की देखरेख में बोरे में बालू और मिट्टी भरकर बंधे का रिसाव बंद करने का कार्य चल रहा है। खतरे के निशान से रविवार को नदी का जल स्तर 1.57 मीटर ऊपर है । तटवर्ती गांवों में नदी का पानी पहुँच गया है।जिलाधिकारी द्वारा नदी के पानी से प्रभावित हल्दिरामपुर रेगुलेटर, तुर्तीपार, मुजौना,,टन्गुनिया, हाहानाला का परिदृश्य देखने के बाद अभी तक पीड़ितों को प्रशासन की तरफ से कोई सहायता पहुँच पाई है। हल्दिरामपुर रेगुलेटर से लगातार नदी का पानी कोइली मुहाँन ताल में गिर रहा। जिससे किसान की सैकड़ो एक खेती की जमीन जलमग्न हो गयी है। प्रशासन द्वारा पानी रोकने के लिए कोई कदम नही उठाया जा रहा है।नदी के पानी ने तटवर्ती गांव और खेतों में खड़ी फसल पर कहर बरपाना शुरू कर दिया है।नदी के कहर से तुर्तीपार स्थित शमशान घाट भी पूरी तरह पानी में डूब चुका है।अब शमशान घाट का बंधे पर ही मृतकों की अंत्येष्टि जारी है। तुर्तीपार, हाहानाला, राजभर बस्ती टगुनिया, गुलौरा मठिया गांव, मुजौना के कई घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। जिससे ग्रामीणों को घोर परेशानी उठानी पड़ रही है। पशुपालकों के सामने पशुओं का भूसा भींग जाने के चलते पशुओं को चारे की दिक्कत हो गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार रविवार को 4 बजे नदी का जलस्तर 65.580 मीटर दर्ज किया गया जो खतरे के निशान 64.010 मीटर से 1. 57 मीटर ऊपर है। आयोग के अनुसार नदी के जलस्तर में प्रति घंटे में एक एक सेंटीमीटर घटाव की सम्भावना जताई जा रही है। प्रशासन द्वारा बाढ़ से निपटने का दावा खोखला साबित हो रहा है।
