“बागी बलिया की बेटी” BHU के बाहर धरने पर – टॉप रैंक होने के बावजूद पीएचडी में दाखिले से वंचित, आरोपों में घिरे डीन
वाराणसी | संवाददाता
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) में पीएचडी दाखिले को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। बलिया की रहने वाली अर्चिता सिंह, जो EWS कोटे में 15वीं रैंक पर हैं, बीते 20 दिनों से BHU के सेंट्रल ऑफिस के बाहर धरने पर बैठी हैं। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय के डीन एक “खास” व्यक्ति को दाखिला दिलाने के लिए नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।
अर्चिता का दावा है कि उन्होंने सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा किए, लेकिन फिर भी उन्हें जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। वहीं, अर्चिता का यह भी आरोप है कि मेरिट सूची में उनसे पीछे—18वीं रैंक वाले ABVP से जुड़े आदित्य त्रिपाठी को दाखिला देने की कोशिश हो रही है।
“यह सिर्फ मेरी लड़ाई नहीं, यह सच्चाई और मेरिट की लड़ाई है,” कहती हैं अर्चिता, जिनकी आवाज़ अब सोशल मीडिया पर गूंजने लगी है। बलिया की यह ‘बागी बेटी’ उस ज़िले से आती हैं, जो हमेशा अन्याय के खिलाफ खड़ा रहा है—और अब वही जज़्बा अर्चिता के संघर्ष में दिख रहा है।
स्थानीय छात्रों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पूर्व छात्रों ने BHU प्रशासन से पारदर्शिता की मांग की है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या एक प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय में भी अब मेरिट की बजाय सिफारिश और राजनीति को तरजीह दी जा रही है?
BHU प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है।
