सलेमपुर लोकसभा से किसी दल से ब्राह्मण प्रत्याशी नही होने से सभी दलों के प्रत्याशियों की निगाहें ब्राह्मण मतदाताओं पर!
सलेमपुर लोकसभा में ब्राह्मण मतदाता तय करेंगे प्रत्याशियों का भविष्य
सलेमपुर लोकसभा चुनाव में जिस दल के साथ ब्राह्मण रहते है, उसी पार्टी का सांसद बनता है
बिल्थरारोड। सलेमपुर लोकसभा में इस बार के चुनाव में भाजपा और सपा- इंडिया गठबंधन प्रत्याशी की नजर ब्राह्मण मतदाताओं पर टिकी है। सलेमपुर लोकसभा में लगभग 15 प्रतिशत ब्राह्मण मतदाता है। किसी दल ने सांसद पद हेतु ब्राह्मण को टिकट नही दिया है। जिससे भाजपा और सपा इंडिया गठबंधन प्रत्याशी ब्राह्मण मतदाताओं को लामबंद करने में लगे हुए है। यहाँ का इतिहास यह भी रहा है कि चुनाव में जिस पार्टी के साथ ब्राह्मण मतदाता रहे है उसी पार्टी का सांसद बना है। सलेमपुर संसदीय क्षेत्र के इतिहास को देखा जाय तो 7 बार ब्राह्मण और 8 बार कुशवाहा जाति का बर्चस्व रहा है। तथा दो बार राजभर जाति का सांसद रहा है। 1952 से लेकर अब तक के इतिहास को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने कुशवाहा विरादरी के बर्चस्व को देखते हुए निवर्तमान सांसद रविन्द्र कुशवाहा को तीसरी बार मैदान में उतारा है। निवर्तमान सांसद रविन्द्र कुशवाहा के पिता स्व0 हरिकेवल प्रसाद कुशवाहा सलेमपुर लोकसभा से चार बार वर्ष 1989, 1991 में जनता दल से, 1998 और 2004 में सपा से सांसद रहे है। इनके निधन के बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा द्वारा इनके पुत्र रविन्द्र कुशवाहा को टिकट न दिए जाने के बाद भाजपा ने रविन्द्र कुशवाहा को अपना प्रत्याशी बनाया और चुनाव में 392213 मत प्राप्त किया जबकि दूसरे नम्बर पर रहे बसपा प्रत्याशी रविशंकर सिंह पप्पू को 159871 मत मिले, जिसमे बसपा प्रत्याशी को 232342 मतों के भारी अन्तर से पराजित कर रविन्द्र कुशवाहा ने सलेमपुर लोकसभा से पहली बार भारतीय जनता पार्टी का परचम लहराते हुए सांसद बने। तीसरे नम्बर पर रहे सपा प्रत्याशी हरिवंश सहाय को 159688 मत मिले और बसपा प्रत्याशी में मात्र 183 मतों का अन्तर रहा। चौथे नम्बर पर भारतीय सुहलदेव पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर को 66084 मत मिले जबकि पाचवे नम्बर पर रहे डॉ0 भोला पाण्डेय को 47890 मत मिले। सलेमपुर लोकसभा के पूर्व में बने सांसदो के इतिहास को देखा जाय तो लगभग ढाई दशक तक ब्राह्मण ही लगातार सांसद रहे। जो कांग्रेस पार्टी के ही सांसद रहे। जिसमे 1952 सरयू मिश्र, 1957 में विश्वनाथ मिश्र, 1962 में विश्वनाथ मिश्र, 1967 में विश्वनाथ मिश्र और 1971 में तारकेश्वर मिश्र सांसद रहे। इमरजेंसी के बाद 1977 में जनता पार्टी से रामनरेश कुशवाहा सांसद बने। इसके बाद कांग्रेस पार्टी से रामनगीना मिश्र सन 1980 और 1984 में लगातार दो बार जीत दर्ज कर सांसद बने। इसके बाद से ब्राह्मण जाति का किसी दल से सांसद नही बना साथ ही कांग्रेस का किला भी धराशायी हो गया। सन 1989 और 1991 के लोकसभा चुनाव में जनतादल से हरिकेवल प्रसाद लगातार दो बार सांसद रहे।1996 के चुनाव में सपा से हरिवंश सहाय सांसद बने। 1998 के चुनाव में हरिकेवल प्रसाद ने सपा के टिकट पर चुनाव लड़कर तीसरी बार सांसद बने। 1999 में बसपा से बब्बन राजभर सांसद बने। 2004 में हरिकेवल प्रसाद कुशवाहा सपा के टिकट पर सांसद का चुनाव जीतकर सलेमपुर लोकसभा का प्रतिनिधित्व किया। 2009 के लोकसभा चुनाव में बसपा से रमाशंकर राजभर विद्यार्थी सांसद बने। तथा 2014 में हरिकेवल प्रसाद कुशवाहा के पुत्र रविन्द्र कुशवाहा भाजपा के टिकट पर सांसद बने। 2019 में भाजपा ने रविन्द्र कुशवाहा को दुबारा प्रत्याशी बनाया। जबकि सपा – बसपा गठबन्धन से यह लोकसभा सीट बसपा कोटे में जाने के कारण बसपा ने अपने प्रदेश अध्यक्ष आर एस कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया। जिसमे रविन्द्र कुशवाहा ने दूसरी बार जीत दर्ज किया। इस बार 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने रविन्द्र कुशवाहा पर भरोसा जताते हुए तीसरी बार टिकट दिया है। वही सपा इंडिया गठबंधन से पूर्व सांसद रमाशंकर राजभर तथा बसपा से पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर प्रत्याशी है। देखना यह है कि इस बार के चुनाव में ब्राह्मण मतदाता किस दल के प्रत्याशी पर भरोसा जताते है। अगर रविन्द्र कुशवाहा तीसरी बार जीतते है तो सलेमपुर लोकसभा के नाम एक इतिहास बनेगा।

