चन्दाडीह स्थित मातु जी महारानी मन्दिर पर नारद मोह का प्रसंग सुनकर श्रोतागण मन्त्रमुग्ध हो उठे


बिल्थरारोड। क्षेत्र के चन्दाडीह स्थित माँ मातेश्वरी सोनकली देवी मन्दिर के प्रांगण में चल रहे सात दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा और मांस कथा के चौथे दिन नारद मोह का प्रसंग चला जिसे सुनकर श्रोतागण भाव विभोर हो गए। गुरु गोरखनाथ मन्दिर से पधारे कथा व्यास पण्डित अनुराग शास्त्री ने नारद मोह पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब भगवान विष्णु से मिलकर नारद जी निकलते है तो उनका अभिमान हो गया। उनके घमंड को तोड़ने के लिए विष्णु जी ने रास्ते मे एक सुंदर नगर बना दिया । उस नगर में शीलनिधि नाम का वैभवशाली राजा रहता था। उस राजा की विश्वमोहिनी नाम की बहुत सुंदर लड़की थी। नारद मुनि विश्व मोहिनी पर मोहित हो जाते हैं और उनसे विवाह करने के लिए नारायण से उनका हरि रूप मांगते हैं। देवर्षि नारद के कथन के अनुसार भगवान उन्हें हरि रूप यानी वानर का रूप प्रदान कर देते हैं। जिसके कारण स्वयंवर में उनका मजाक बनता है। जिसके बाद विश्व मोहिनी भगवान श्रीहरि के गले मे वरमाला डाल कर विवाह करती है। उसी समय स्वयंवर में बैठे शिव के दो गण ताना कसते हुए नारद जी से कहते है कि जरा अपना मुंह दर्पण में तो देखिए। नारद जी ने जल में झांककर अपना मुंह देखा। अपना मुँह बन्दर का देख क्रोधित हो जाते है। और विष्णु जी को श्राप दे देते है। बाद में नारद जी को पछतावा होता है और वन को चले जाते है।कथा को सुनकर भक्तगण मंत्रमुग्ध हो उठे। वही झांसी से पधारे पण्डित सन्तोष जी ने हनुमत कथा के मार्मिक प्रसंग पर प्रकाश डाला। इस मौके पर समाजसेवी विनय मिश्र, पुजारी आनन्द पाण्डेय, जय पाण्डेय, अवधेश मिश्र, रामप्यारे मिश्र, जयप्रकाश मिश्र, सदानन्द मिश्र, नायब सिंह, कृष्णानंद मिश्र, पारस मिश्र, संचालक निक्कू पाण्डेय, दयाशंकर सिंह सहित भारी संख्या में श्रद्धालुओ ने कथा का रसपान किया।
