अब पानी के जहाज से जा सकते हैं वाराणसी और पटना

-वाराणसी से गंगा नदी के रास्ते सैलानियों को जल मार्ग से यात्रा कराने की तैयारी जल्द पूरी होने वाली है। पर्यटन विभाग की यह दूसरी कोशिश है। विभाग ने पटना से क्रूज खुलने के बाद दानापुर, मनेर, डोरीगंज, रिविलगंज, सुंदरपुर, बराज, रूद्रपुर, बलिया, बक्सर, चौसा, जमानियां, गहमर, गाजीपुर, रजवारी के बाद अंतिम पड़ाव वाराणसी होगा। जलयात्रा पटना से वाराणसी तक चार दिनों की यात्रा होगी।इसके पूर्व 2006 में कोलकाता से वाराणसी तक पांडव क्रूज चलाया तो था, लेकिन गंगा नदी में गाद व कम पानी के कारण दूसरी बार में अपने गंतव्य स्थान तक नहीं पहुंच पाया। सैलानियों को लग्जरी गाड़ियों से वाराणसी भेजना पड़ा। पांडव क्रूज को कोलकाता में ही खड़ा करा दिया गया। पर्यटन विभाग को मायूसी हाथ लगी। इस बार पर्यटन विभाग हर हाल में वाराणसी से पटना तक क्रूज को चलाने की पूरी तैयारी में है। यदि सैलानी अपने परिवार के साथ जल यात्रा करना चाहते हैं तो उनके लिए यह काफी मुफीद रहेगी। क्योंकि जल्द ही दो डबल डेकर क्रूज की सुविधाएं मिलने वाली हैं।
यदि सैलानी अपने परिवार के साथ जल यात्रा करना चाहते हैं तो उनके लिए यह काफी मुफीद रहेगी। क्योंकि जल्द ही दो डबल डेकर क्रूज की सुविधाएं मिलने वाली हैं। सैलानियों को गंगा नदी के रास्ते जल यात्रा का आनन्द भी ले सकेंगे। सबसे पहले क्रूज को पटना के गांधी घाट से चलाने की तैयारी है। पर्यटन विभाग को क्रूज को पुन: चलाने के पीछे पर्यटन को बढ़ावा देने की असीम संभावनाएं दिखाई दे रही है। यह मानकर चल रहे हैं कि गंगा नदी में जल यात्रा को जरूर बढ़ावा मिलेगा। ये केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना में शुमार है। ऐसे में विभाग की तैयारी जोरों से चल रही है।
पर्यटन विभाग ने पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 2006 में कोलकाता से वाराणसी तक पांडव क्रूज की जल यात्रा शुरू की थी। पांडव क्रूज पर विदेशी सैलानियों की भीड़ ज्यादा देखने को मिली थी, लेकिन पांडव क्रूज का दुर्भाग्य यह रहा कि उसे गंगा के गाद व कम पानी होने के कारण क्रूज गंगा नदी में जगह जगह रुक जाता था। जब दूसरी बार आया तो अपने गंतव्य स्थान तक नहीं पहुंच पाया। मजबूरी में विभाग को सैलानियों को लग्जरी गाड़ियों से वाराणसी भेजना पड़ा। तभी से जल यात्रा रोक दी गई थी। पर्यटन विभाग फिर से गंगा नदी में जल यात्रा कराने के लिए तैयारी कर लिया है तो इस बार सफलता की प्रबल संभावना है।
नीलेश दीपु
