जाको राखे साइयां, मार सके न कोय”
सर्पदंश से जूझ रही नवविवाहिता की बची जान, ‘सती माई’ की भभूत बनी जीवन रक्षक!

(बिल्थरारोड)
बलिया जिले के सीयर क्षेत्र अंतर्गत बघुड़ी गांव में सोमवार शाम एक ऐसा चमत्कार हुआ जिसने जनमानस को झकझोर दिया।
यह घटना न सिर्फ चिकित्सा और आस्था के द्वंद्व को उजागर करती है, बल्कि इस बात का भी प्रमाण बन गई है कि जब “ऊपरवाला” साथ होता है तो मौत भी पीछे हट जाती है।
जानकारी के अनुसार, मई 2025 में ब्याही गई एक नवविवाहिता महिला सोमवार शाम अचानक सर्पदंश का शिकार हो गई। परिवारजन आनन-फानन में उसे सीयर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर पहुंचे, जहां डॉ. कुशाग्र सिंह ने प्राथमिक उपचार किया। हालत गंभीर होने के चलते उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।
हालांकि, सीएचसी स्टाफ का कहना था कि महिला के शरीर पर सांप काटने का कोई स्पष्ट निशान नहीं मिला।
इस पर मरीज के परिजन का मानना है कि महिला के पैर में रंग लगा होने के कारण उस समय काटने का निशान दिखाई नहीं दिया।
इलाज के साथ-साथ आस्था का सहारा लेते हुए परिजन महिला को लेकर बलिया के प्रसिद्ध “अमाव की सती माई” मंदिर पहुँचे।
वहाँ के पुजारी ने महिला को सती माई की भभूत लगाई। कुछ देर बाद महिला की साँसे सामान्य होने लगीं और चेतना लौट आई, जिसे परिजन ने साक्षात चमत्कार माना।
पत्रकारों से बात करते हुए महिला के परिजनों ने बताया:
“डॉक्टर ने तो जवाब दे दिया था, लेकिन सती माई की कृपा से हमारी बहू फिर से जिंदा हो गई। भभूत लगते ही उसमें हरकत दिखने लगी और अब वह पूरी तरह स्वस्थ है।”
इस घटना के बाद इलाके में सती माई मंदिर के प्रति आस्था और भी गहरी हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई साधारण धार्मिक स्थान नहीं, बल्कि चमत्कारिक शक्ति का केंद्र है।
