बिल्थरारोड में लगन के मौसम में भी बाज़ार सूना, दुकानदार परेशान दुकानदारों ने क्या कुछ कहा आप भी पढ़ें !


बिल्थरारोड (बलिया) — एक समय था जब लगन के दिन बेल्थरारोड बाज़ार में ग्राहकों की भीड़ देखते ही बनती थी। बर्तन से लेकर सर्राफा तक, और किराना से लेकर इलेक्ट्रॉनिक तक — हर दुकान पर खरीदारों की लाइन लगी रहती थी। लेकिन इस बार हालात बिल्कुल उलट हैं। मई महीने के शुभ मुहूर्तों के बावजूद बाज़ार में सन्नाटा पसरा हुआ है।

शादी-विवाह के सीजन में काम आने वाले सामान जैसे बर्तन, आलमारी, बक्सा, गहने, सजावट का सामान और उपहार सामग्री की बिक्री लगभग ठप हो गई है। दुकानदारों की माने तो न तो ग्राहक आ रहे हैं और न ही बिक्री हो रही है।

दुकानदारों की जुबानी

बर्तन दुकानदार जोगेश्वर बरनवाल का कहना है, “लगन के दिनों में तो पहले दुकान में पैर रखने की जगह नहीं होती थी, लेकिन अब दो-दो दिन तक एक भी ग्राहक नहीं आता।”

जोगेश्वर बरनवाल बर्तन वाले

किराना व्यापारी  चंदन मद्देशिया कहते हैं, “शादी में उपयोग होने वाले ड्रायफ्रूट, मसाले, गिफ्ट पैकिंग और मिठाई के सामान की मांग पहले जैसी नहीं रही।”

चंदन किराना

इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने वाले विनोद वर्मा बताते हैं, “टीवी, मिक्सर, हीटर, फ्रीज जैसी वस्तुएं अब लोग ऑनलाइन ऑर्डर कर रहे हैं। लोकल मार्केट का विश्वास घटा है।”

विनोद वर्मा इलेक्ट्रॉनिक

सर्राफा कारोबारी शुभम वर्मा कहते हैं, “सोने-चांदी के भाव तो बढ़े ही हैं, ऊपर से ग्राहक भी नदारद हैं। केवल देख कर चले जाते हैं।”

शुभम वर्मा

आलमारी व बक्सा व्यापारी विजय गुप्ता बताते हैं, “शादी में दिया जाने वाला फर्नीचर अब लोग मॉल या बड़े ब्रांडेड स्टोर से खरीद रहे हैं। लोकल कारीगरों को तो जैसे भुला ही दिया गया है।”

आलमारी बक्सा दुकानदार विजय गुप्ता

क्या हैं कारण?

  1. ऑनलाइन शॉपिंग का असर — महामारी के बाद लोग तेजी से ऑनलाइन शॉपिंग की ओर मुड़े हैं। अमेज़न, फ्लिपकार्ट और मीन्त्रा जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर भारी छूट और आसान डिलीवरी ने लोकल दुकानों को बड़ा झटका दिया है।
  2. गाँव-गाँव में खुली दुकानें — पहले लोग दूर-दराज़ के गाँवों से भी बेल्थरारोड बाज़ार आते थे, लेकिन अब हर गाँव-कस्बे में छोटी-बड़ी दुकानें खुल गई हैं। इससे ग्राहक स्थानीय स्तर पर ही सामान ले रहे हैं।
  3. महंगाई और बजट का दबाव — शादी-ब्याह में खर्च संभालना मुश्किल हो रहा है। लोग अब पहले की तरह खुले हाथों से खर्च नहीं कर रहे हैं।

दुकानदारों की अपील

स्थानीय दुकानदारों ने ग्राहकों से अपील की है कि वह एक बार फिर स्थानीय बाज़ार को प्राथमिकता दें। इससे न सिर्फ लोकल व्यापार को सहारा मिलेगा, बल्कि रोज़गार भी बढ़ेगा।

🖊️ निलेश दीपू

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