महाविद्यालय के संस्थापक बाबू देवेन्द्र सिंह ईमानदार व व्यक्तित्व के धनी थे- डॉ शिवाकांत मिश्र



बिल्थरारोड। देवेन्द्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संस्थापक बाबू देवेन्द्र सिंह की 31 वी पुण्यतिथि एवं शिक्षक पर्व के मौके पर बुधवार को महाविद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह का शुभारंभ कालेज के प्रबन्धक सुशील कुमार सिंह एवं मुख्य अतिथि डॉ अशोक सिंह द्वारा वाग्देवी माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर एवं संस्थापक बाबू देंवेन्द्र से चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ अशोक सिंह ने कॉलेज के संस्थापक के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्व0 बाबू देवेन्द्र सिंह ने क्षेत्र में बालिकाओं और बालको के लिए शिक्षा की कमी और उच्च शिक्षा के कॉलेज न होने पर उन्होंने श्यामसुन्दरी बालिका इण्टर कालेज और देवेन्द्र महाविद्यालय की स्थापना करके शिक्षा के क्षेत्र में नया आयाम देने का काम किया। कहा कि स्व0 सिंह साहब ईमानदार और व्यक्तित्व के धनी थे। वही डॉ शिवाकांत मिश्र ने कहा कि स्व 0 बाबू देंवेन्द्र सिंह ने शिक्षा से यहाँ के बालक बालिकाओं को जोड़ने का काम किया।। सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान समारोह में कहा कि शिक्षक ही राष्ट्र के निर्माता होते है। आज का दिन इस महाविद्यालय के लिए ही नही अपितु समुचित क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक दिन रहा। क्यो कि लम्बे दौर के बाद इस तरह का कार्यक्रम भव्यता के साथ पहली बार सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में महाविद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षक डॉ दीनानाथ त्रिपाठी, डॉ अशोक कुमार सिंह, डॉ राजेन्द्र सिंह, डॉ मिथिलेश सिंह को मोमेंटो प्रदान कर अंगवस्त्र देंकर सम्मानित किया गया। अपने स्वागत से अभिभूत सेवानिवृत्त शिक्षकों ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि आज की युवा पीढ़ी के समक्ष अनेको चुनौतियां होते हुए भी। ज्ञान प्राप्ति के अवसर उपलब्ध है जिसका उन्हें उठाते हुए राष्ट्र के निर्माण और समाज मे अपना योगदान देना चाहिए। इस मौके पर प्राचार्य डॉ हरेराम सिंह, डॉ अरविन्द कुमार सिंह, डॉ मुकेश कुमार झा, डॉ उमेश कुमार सिंह,डॉ पुरुषोत्तम पाण्डेय, डॉ सन्तोष कुमार सिंह, डॉ अमित कुमार, समरजीत सिंह, रामप्रताप चौरसिया, डॉ पंकज प्रेम , डॉ स्मिता सरोज, अभय सिंह, विनोद सिंह , प्रवीण कुमार सिंह आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डॉ हरेराम सिंह व संचालन डॉ वीरेन्द्र सिंह ने किया।
