समूह को बनाया हथियार !घरों में फैला रही उजाला


नगरा आज महिलाएं सेना , शिक्षा से लेकर हर क्षेत्र में कामयाबी का परचम लहरा लहीं हैं। कुछ तो ऐसीं हैं जो राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को हथियार बना कर महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की दिशा में कार्य कर रहीं हैं। ऐसी ही महिलाओं में भीटकुना की फूल कुमारी का नाम भी सुर्खियों में है। फूल कुमारी ने वर्ष 2016 में 11 सदस्यीय लक्ष्मी स्वंय सहायता समूह का गठन किया था। इसके माध्यम से वह महिलाओं को स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित करतीं रहीं। वर्ष 2019 में फूल कुमारी ने नवार्ड से प्रशिक्षण लेकर मोमबत्ती बनाने का कार्य शुरु किया। वर्तमान समय में फूलकुमारी की मोमबत्ती ने क्षेत्र के बाजारों में धूम मचा दिया है। बिजली गुल होने पर घरों में उजाला हो रहा है। शुरुआती दौर में तो इस कार्य में समूह की तीन महिलाएं जुडी थीं किंतु साल भर बाद तीनों ने साथ छोड दिया। इसके बावजूद फूलकुमारी ने हिम्मत नही हारा। वे स्वंय ही इस कार्य में जुट गईं। उन्होने इस धंधे के लिए समूह से 5 हजार रुपए का कर्ज लिया तथा 10 हजार स्वंय का खर्च किया था। बतातीं हैं कि समूह से लिया गया ऋण को चुकता कर दी हूं।


मोमबत्ती बनाने में इन सामग्रियों का होता है प्रयोग-
मोमबत्ती बनाने में मोम, धागा, रंगीन प्लास्टिक, सादा प्लास्टिक का प्रयोग किया जाता है। इसमें रंगीन प्लास्टिक से पैकिंग की जाती है।
कितने की बिकती है मोमबत्ती-
फूलकुमारी द्वारा बनाई गई मोमबत्ती खुदरा में 5 रुपए, 2 रुपए व 1 रुपए में बिकती है। थोक में बिक्री के लिए 30 कैंडिल का पैकेट तैयार होता है। इसका मूल्य निर्धारण वजन के हिसाब से होता है।
इन बाजारों में बिकती है मोमबत्ती-
फूलकुमारी की मोमबत्ती नगरा, मालीपुर, विशुनपुरा, मलप, निकासी, बछईपुर सहित अन्य बाजारों में बिक रही है।

भिटकुना में मोमबत्ती बनाती फुल कुमारी

नीलेश दीपु

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