मार्केटिंग पॉलिसी से ग्राहकों की जेब हो रही है ढीली

बिल्थरारोड/ बेतहाशा बढ़ती महंगाई के बीच भी अगर तेल, बिस्किट, चिप्स ,नमकीन आदि समेत प्रतिदिन उपयोग में आने वाले सामान 1 साल पहले वाले कीमत मिल रहे हैं तो आप यह बिल्कुल ना समझे कि यह प्रोडक्ट महंगे नहीं है पारले जी बिस्कुट, बीकाजी नमकीन, और कोलगेट, टूथपेस्ट ऐसी कई उत्पाद हैं जिनकी कीमत ₹1 भी नहीं बढ़े है लेकिन फिर भी यह महंगे हो गए हैं कंपनियों ने बड़े ही चालाकी से इनके वजन घटा करके सिर्फ नुकसान की भरपाई कर रही है बल्कि आपके पाकेट को ढीले कर रहे हैं कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल के बाद कंपनियों ने नया रास्ता खोज निकाला है अर्थशास्त्र में इस तरीके के बढ़ने वाली महंगाई को सिकुड़न कहते हैं इस प्रोडक्ट की कीमत बढ़ाने की जगह उसके वजन को कम कर दिया जाता है उदाहरण के लिए एक नमकीन बिस्कुट कंपनी की ₹5 मिलने वाली पैकेट 3 महीने पहले भी ₹5 था और आज भी ₹5 ही है लेकिन ऐसा नहीं है कि यह कंपनी नुकसान उठा रहा है कंपनी से अपने नुकसान की भरपाई के लिए इसके वजन को 64 ग्राम से घटाकर के 55 ग्राम कर दिया है कुछ ऐसे ही हाल एक नमकीन कंपनी के नमकीन के ₹10 वाले पैकेट का है पहले ₹10 मैं जहां आपको 80 ग्राम नमकीन मिलता था वहीं अब इसका वजन 40 ग्राम कर दिया गया है
ऐसे में ही किराना व्यापारी सोनल प्रोविजन स्टोर के संचालक सोनल गुप्ता ने कहा कि बात घुमा करके वही है कीमत नहीं बढ़ाया जाए पर वजन घटा दिया जाए तो इसे कीमत बढ़ाना ही कहा जाएगा हम लोग कंपनी एवं ग्राहक के बीच की कड़ी है कंपनी के उत्पादों की कीमत से बढ़ोतरी होगी तो दुकानदार को कीमत बढ़ाना मजबूरी हो जाएगा यदि कंपनी की उत्पादन में कमी आएगी तो दुकानदार भी कीमत में कमी करेंगे दुकानदार अपने मुनाफे के अनुसार काम करते हैं बताया कि यह सच है कि उत्पाद के वजन में कटौती से लोगों को नुकसान हो रहा है
नीलेश दीपू
