बच्चों में ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर मोबाइल देखने और गेम खेलने की लत ,अभिभावकों के लिए बना सरदर्द

बिल्थरारोड। बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल देना अब अभिभावकों के लिए सरदर्द बन गया है। मोबाइल की लत ने बच्चों को पढ़ाई करने के बजाय गेम खेलने की आदत हो गई है। गेम खेलने पर बच्चे को मां और बाप के डांट देने पर या तो स्वयं मौत को गले लगा ले रहे है या मां – बाप की हत्या कर दे रहे है। आधुनिक युग मे मोबाइल को शिक्षा का एक साधन बनाया गया है एक तरफ बच्चे इसका सकारात्मक पहल करके लाभ ले रहे है। वही दूसरी तरफ इससे बुरी लत भी अधिक बढ़ रही है। ऐसे में अभिभावकों कुछ समझ मे नही आ रहा है कि बच्चों को मोबाइल से पढ़ाई कराये या न कराये। कोरोना काल मे कुछ अभिभावक ऐसे थे जिन्हें दो जून की रोटी के लाले पड़ गए थे। वे भी किसी तरह अपने बच्चों की ऑनलाइन की पढ़ाई के लिए मजदूरी करके या कर्ज लेकर एंड्राइड मोबाइल खरीदने का कार्य किया। किन्तु आज यह मोबाइल बच्चों की गलत लत के चलते अभिभावकों के लिए मुसीबत बन गयी है। एक अभिभावक रमेशचंद मिश्र जो सेवानिवृत्त अध्यापक है। उनका कहना है कि हम लोग के समय बिना मोबाइल के पढ़ाई होती थी। आज के दौर से किताब का सलेबस बड़ा था। फिर लोग कड़ी मेहनत कर अच्छी पढ़ाई करते थे। किंतु आज बच्चों की पढ़ाई का मोबाइल एक साधन बन गया है। मोबाइल जहाँ एक तरफ अच्छा है तो दूसरी तरफ मोबाइल में कभी कभी प्रचार के रूप में गलत फोटो और वीडियो अपने आप आने लगते है। इससे बच्चों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। बच्चे गलत कदम भी उठा दे रहे है। अभी अभी दो घटनाये हुई है जिसमे बच्चे को पब्जी गेम खेलने से मना करने पर माँ को ही गोली मार दिया । वही दूसरी घटना में माँ- बाप के डॉट से छुब्ध लड़के ने आत्महत्या कर लिया । इस तरह की हो रही घटनाओं से अभिभावकों में बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता की लकीरें गहराने लगी है।
