सवाल पूछना बना “जुर्म”? दरोगा से जानकारी मांगना पत्रकार को पड़ा महंगा

बिल्थरारोड।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर दबाव बनाने की कोशिश का एक गंभीर मामला सामने आया है। उभांव थाना क्षेत्र में हल्का नंबर एक की एक घटना को लेकर जब एक दैनिक समाचार पत्र के पत्रकार ने थाने पर तैनात दरोगा से जानकारी लेनी चाही, तो सवाल का जवाब देने के बजाय दरोगा साहब को पत्रकार की डिग्री और पढ़ाई ज्यादा महत्वपूर्ण लगने लगी।
घटना की जानकारी देने से इनकार करना और उल्टे पत्रकार की शैक्षणिक योग्यता पूछना न सिर्फ असंवैधानिक है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। नियमों के अनुसार किसी भी पुलिसकर्मी को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी पत्रकार से फोन पर उसकी डिग्री या पढ़ाई के संबंध में सवाल करे। ऐसी जानकारी लेने का अधिकार केवल सूचना विभाग को है।
मामला यहीं नहीं रुका। जब पत्रकार धीरज गुप्ता ने इस व्यवहार की शिकायत उच्चाधिकारियों से की, तो कथित तौर पर थाने के साहब की ओर से एक दीवान के माध्यम से फोन कर यह संदेश भिजवाया गया कि “साहब मुकदमा भी करते हैं।”
इस कथन को पत्रकारों को डराने और दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
जब इस पूरे प्रकरण पर उभांव इंस्पेक्टर से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि “हम नए हैं, आपको जानते नहीं हैं।” लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी पत्रकार को जानना-पहचानना सूचना देने की शर्त हो सकता है?

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